Friday, June 8, 2012

Water in Athrva ved !


आजकल पानी यानी जल यानी वाटर के लिए बहुत मारामारी चल रहेला है – ---
तो भाई अथर्ववेद में लिखा है की
“ आपो ही स्त्ठामयोभूवास्ता न ऊर्वे दधातन महेर्णय च्छसे |
यो वः शिवतामो रस सतस्य भाजयतेह न: उशतीरिव |
तस्मा आरंगमान वो यस्य छ्याय जिन्वय आपो जन्यया च न : “
यानी ---- हे जल आप निश्चय ही सुखकारक हो, बल और प्रान्ड शक्ति से पुष्ट करें ,
जिससे हम बड़े बड़े संग्रामो को देख सकें ,
जिस प्रकार माताएं अपने पुत्रों को दूध पिलाकर पालन पोशंड करती हैं ,
उसी प्रकार हे जल - तुम्हारा जो कल्याणकारी रस है उसका हमें भागी बनाओ ,
हे जल हम उसी जीवन रस को प्राप्त करने के लिए तुम्हारी शरण में आते हैं ,
जिसके धारणआर्थ ही तुम्हारी सत्ता है और जिसके द्वारा तुम हमें उत्पन्न करते हो |
 
अनूभवी अज्ञानी